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नही दिया किराया तो कर्ण ताल में 6 दुकानों व 1 रेस्टोरेंट पर नगर निगम ने लिया कब्जा, डिफाल्टर दुकानदारों को भेजे नोटिस

नही दिया किराया तो कर्ण ताल में 6 दुकानों व 1 रेस्टोरेंट पर नगर निगम ने लिया कब्जा, डिफाल्टर दुकानदारों को भेजे नोटिस

करनाल, 15 जुलाई (रोहित लामसर)। नगर निगम आयुक्त अभिषेक मीणा के निर्देश पर, निगम दुकानों का किराया न चुकाने वाले डिफाल्टर दुकानदारों के खिलाफ शुक्रवार सांय एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान कर्ण ताल के अंदर मौजूद 6 दुकानों व 1 रेस्टोरेंट को कब्जे में लिया गया, उनकी तरफ करीब 20 लाख रुपये कई वर्षों से किराया बकाया हो गया था। यह जानकारी नगर निगम की संयुक्त आयुक्त अदिति ने दी। संयुक्त आयुक्त ने बताया कि इस कार्रवाई के लिए उपायुक्त की ओर से उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट बनाया गया था, जबकि सील करने गई टीम में सचिव बल सिंह, रेंट सहायक राम सिंह तथा पुलिस बल मौजूद था। संयुक्त आयुक्त ने बताया कि कार्रवाई में कर्ण ताल पार्क के अंदर मौजूद दुकान नम्बर 1 से 6 तथा एक रेस्टोरेंट को किराया ना भरने की सूरत में कब्जे में लिया गया। सभी दुकानदारों को किराया अदा करने के लिए 2 से 3 बार नोटिस भी जारी किए गए थे, परंतु दुकानदारों द्वारा नोटिस की पालना नहीं की गई। इसके अतिरिक्त दुकान नम्बर 1 व 2 के किराएदार ने दुकानों को बिना नगर निगम की अनुमति के आगे किसी अन्य व्यक्ति को सब-लेट यानि किराए पर दे दी, जो कि बोली की शर्तों की उल्लंघना है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त के मद्देनजर, नगर निगम अधिनियम 1994 की धारा 408-ए के तहत किराएदारों की बेदखली के आदेश पारित किए गए तथा उक्त दुकानों पर निगम ने अपना कब्जा लिया। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त नगर निगम अन्य डिफाल्टर दुकानदारों पर भी शिकंजा कसने जा रहा है। इसके लिए सूची तैयार करके सभी को नोटिस भी बांटे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह दुकानें मेरठ रोड, कम्बोपुरा, राम नगर, प्रेम नगर, कर्ण ताल मार्किट तथा बस स्टैण्ड इत्यादि क्षेत्रों की हैं। संयुक्त आयुक्त अदिति ने बताया कि कब्जा लेने की कार्रवाई पूरी तरह से शांतिपूर्ण रही तथा पुलिस बल के चलते किसी भी दुकानदार ने कहीं भी विरोध नहीं जताया। उन्होंने बताया कि डिफाल्टर दुकानदारों की दुकानो को सीलिंग व कब्जे में लेने की कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी। जो दुकानदार बकाया रेंट को नगर निगम के खजाने में जमा करवा देता है, वह दुकान सील नहीं होगी। लेकिन नोटिस प्राप्त करने के बाद भी जो बकाया रेंट जमा नहीं करवाएगा, उसकी दुकान को अवश्य कब्जे में लिया जाएगा।