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फोटो : गांव नड़ाना में किसानों से चर्चा करते कांग्रेस पार्टी के नेता राजेंद्र बल्ला।

बोले :- पोर्टल के चक्कर में फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहे किसान, सरकार चैन की नींद सो रही

नीलोखेड़ी, 13 अक्तूबर (रोहित लामसर)। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य व पूर्व सदस्य हरियाणा पुलिस भर्ती बोर्ड राजेंद्र बल्ला ने कहा कि हरियाणा सरकार में पोर्टल में खराबी की वजह से किसान धान बेचने के लिए लाइन में लगे रहे, लेकिन सरकार की नींद नहीं खुली रही। उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो फसल खरीदने के लिए कोई इंतजाम किये न ही अनाज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं और हरियाणा सरकार किसानों को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर रही है। कांग्रेस पार्टी के नेता राजेंद्र बल्ला तरावड़ी के नजदीक गांव नड़ाना में किसानों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान धान लेकर पिछले पांच दिनों से मंडी में बैठे हुए हैं लेकिन सरकार की सुस्त चाल किसानों को खून के आंसू रुलवा रही है। राजेंद्र बल्ला ने कहा कि विडंबना ये है कि जो धान बेचने के लिए किसान पांच दिनों से इंतज़ार कर रहे हैं, वही धान एम.एस.पी. से कम दामों में प्राइवेट बाजारों में बिकने को तैयार है। सरकार की सुस्ती की वजह से भीगा हुआ धान सुखाने के लिए किसान अपने घर से दूर सड़कों पर सोने को मजबूर हैं लेकिन “जुमलों के समंदर” में “झूठ की नैया” पर सवार खट्टर जी “शाही बिस्तर” पर आराम फरमा रहें है। भाजपा सरकार किसानों की दुश्मन बन चुकी है, बीमा क्लेम के लिए किसानों से धरना करवाने वाली, बीज के लिए इधर से उधर भटकाने वाली और किसानों को पोर्टल के चक्कर में उलझाने वाली इस सरकार को आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान फसल मंडी में आते ही सरकारी ख़रीद शुरू कर दी जाती थी। इसके चलते प्राइवेट एजेंसियों को भी एनसीपी से ऊँचे रेट पर ख़रीद करनी पड़ती थी और बाज़ार में फसल का रेट बढ़ता था। इसके विपरीत मौजूदा सरकार जानबूझकर ख़रीद में देरी करती है ताकि बाज़ार में फसल के रेट गिर जाए और प्राईवेट ख़रीदारों को सस्ते रेट में फसल मिले व किसानों को घाटा हो। इतना ही नहीं सरकार ने जानबूझकर धान के निर्यात पर भी रोक लगा दी। खट्टर साहब, आगामी चुनाव में प्रदेश के यही किसान अपने कुदाल और फावड़े से आपके “नफरत एवं षड्यंत्रकारी” नीतियों से गढ़े हुए इस शाही तख़्त को उखाड़ फेंकेंगे। इस अवसर पर दया सिंह नडाना, अमर सिंह, भगत सिंह कटारिया नडाना, परमजीत सिंह,जसवंत सिंह, नसीब सिंह, जोगिंदर सिंह गोराया समेत कई किसान मौजूद रहे।

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