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एस.एम.एस. मेमोरियल पब्लिक स्कूल तरावड़ी के बच्चों ने पौधे लगाने के लिए किया प्रेरित

तरावड़ी, 12 जुलाई (रोहित लामसर)। एस.एम.एस. मेमोरियल पब्लिक स्कूल तरावड़ी में वन महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक गुरशरण सिंह ग्रेवाल व प्रधानाचार्या डॉ विभा कौशिक ने किया। स्कूल परिसर में छात्र-छात्राओं द्वारा वृक्षारोपण किया गया। इस मौके स्कूल में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्कूल के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जीवन में पेड़ों का महत्व बताया तथा वन संरक्षण का संदेश दिया। स्कूल में पौधारोपण कार्यक्रम के तहत स्कूल की ओर से पौधे लगाए गए तथा उनकी सुरक्षा व देखभाल का संकल्प भी लिया। बच्चों को ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बताते हुए ‘पेड़ लगाओ-जंगल बचाओ’ के लिए जागरूक किया गया तथा बताया गया कि पर्यावरण का संरक्षण करें ताकि आने वाले समय में हमें आक्सीजन को पीठ पर लेकर चलना नहीं पड़े। नन्हे मुन्ने छात्रों द्वारा वन महोत्सव पर बाल गीत, नृत्य आदि प्रस्तुत किए गए। विद्यालय के प्रबंधक गुरुशरण सिंह ग्रेवाल ने वन महोत्सव पर बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि-वृक्षारोपण करके ही हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए जीवनदान वातावरण सृजित कर सकते है। यदि आज इस दृष्टि से वृक्षों का अस्तित्व मिटा दिया गया तो कल आने वाले समय में इस सृष्टि पर जीवन का होना संभव नहीं होगा। वृक्षों से ही जीवन संभव है, वृक्ष है तो सब कुछ है और यदि वृक्ष नहीं है, तो जीवन में कुछ भी नहीं है। विद्यालय में छात्रों द्वारा विभिन्न औषधीय पौधों को लगाया गया और उनके महत्व के विषय में बताया गया। विद्यालय प्रधानाचार्या डा. विभा कौशिक ने वृक्षो के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति का भी वनों के साथ काफी गहरा नाता है। हमारे ऋषि मुनि भी शांति और एकांत की तलाश में वन में रहते थे। हमारी प्राचीन परंपरा से हमें वक्षों की पूजा करना एवं व्रत रखना और जल चढ़ाना सिखाया जाता है। प्राचीन समय में गुरूकुल भी जंगल में ही हुआ करते थे, ताकि शिक्षा लेते समय मन को एकाग्रता और शुद्ध वातावरण प्राप्त हो। हिन्दू संस्कृति में भी वृक्षों को भगवान का दर्जा दिया गया है। उन्होंने पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया, तथा बच्चो को नसीहत देते हुए कहा कि अपने जन्म दिवस पर एक-एक पौधा जरूर लगाए। कार्यक्रम के समापन में विद्यालय में प्रधानाचार्या और अन्य स्टाफ सदस्यों द्वारा त्रिवेणी लगाई गई।

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